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“दोस्ती, धर्म और दीवार” लेखक ज़ैनुल आबेदीन खान का एक बेहद भावनात्मक और विचारोत्तेजक हिंदी उपन्यास है, जो दोस्ती, प्रेम और समाज द्वारा खड़ी की गई दीवारों के बीच जूझती मानव भावनाओं को उजागर करता है।
जैसा कि लेखक कहते हैं — “अकेले दिन की रोशनी में चलने से बेहतर है कि हम अँधेरी रात में चले और साथ में हमारा सच्चा मित्र हो।” यही इस कहानी की आत्मा है।
यह उपन्यास दिखाता है कि कैसे रिश्ते अक्सर धर्म, जाति और समाज की सीमाओं में उलझ जाते हैं। लेकिन सच्ची दोस्ती और इंसानियत इन दीवारों से कहीं ऊपर होती है। कहानी के पात्र जीवन की कठिन परिस्थितियों में अपने फैसलों, भावनाओं और सामाजिक दबावों से जूझते हुए पाठक को एक गहरी सोच में डाल देते हैं।
लेखक ने बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा में एक ऐसी कहानी प्रस्तुत की है जो न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि समाज के कई पहलुओं पर सोचने के लिए मजबूर भी करती है।
Rigi Publication द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक paperback और eBook दोनों रूपों में उपलब्ध है, साथ ही eBook को www.rigipublication.com पर किराए पर भी पढ़ा जा सकता है।
Keypoints:
- 146 पृष्ठों का प्रभावशाली सामाजिक हिंदी उपन्यास
- दोस्ती, प्रेम और सामाजिक बाधाओं पर आधारित कहानी
- सरल और भावनात्मक भाषा
- आधुनिक भारतीय समाज से जुड़ी वास्तविकता
- Paperback और eBook (Buy & Rent) दोनों में उपलब्ध
Bullets:
- सच्ची दोस्ती की ताकत को दर्शाता उपन्यास
- समाज की दीवारों पर सवाल उठाती कहानी
- भावनाओं से भरपूर और दिल को छूने वाली कथा
- हर पाठक को सोचने पर मजबूर करने वाली रचना
- meaningful हिंदी साहित्य के प्रेमियों के लिए परफेक्ट
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789384314460 |
| Publication date | 25 June 2016 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 146 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
ज़ैनुल आबेदीन खान एक संवेदनशील और सामाजिक मुद्दों को उजागर करने वाले लेखक हैं। उनकी लेखनी में समाज की सच्चाई, मानवीय रिश्तों की गहराई और भावनाओं की सजीव अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।
वे अपनी कहानियों के माध्यम से पाठकों को सोचने, समझने और समाज को एक नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करते हैं। “दोस्ती, धर्म और दीवार” उनकी लेखन शैली और सामाजिक समझ का बेहतरीन उदाहरण है।