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यह कही न लाख टके की बात, सचमुच ही फकीरा राम महतो जैसे महात्मा पुरूष तो जिंदगी भर ही गोदान से पहले इतना पुण्य कमा लेते हैं कि वैतरणी में गऊ माता खुद रास्ते की तमाम बाधाएं हटाती उनके आगे- आगे चलती है और स्वर्ग की परियां उनके ऊपर चंवर डुलाती रहती हैं। “होरी के मामा हरिभगत दास ने गर्व से कहा। उसने आगे कहा “ महतो हमें तो इस खानदान पर गर्व है। जहां रामसेवक महतो ने बेलारी गाँव की गरीब कन्याओं की शादी करवाने की परम्परा शुरू करी थी। उसे उनके बेटे साधुराम महतो ने आगे बढ़ाया था। वहीं उनके बेटे फकीरा राम महतो ने भी उसी लीक पर चलकर गरीब बेटियों को अपने घर में शरण दी है। ऐसे महात्मापुरुषो से बेलारी गाँव का नाम ताल्लुका में जाना जाता है। निस्वारथ परोपकार से अपने बुजुरगों की परम्परा बनाए रखना और उनकी मरजाद के लिए बड़े से बड़ा त्याग करने वाला ही सही मायने में मोक्ष का अधिकारी बन सकता है। हरि कृपा बनी रही तो यह परम्परा आगे भी इसी तरह कायम रहेगी।
Keypoints:
- यह कही न लाख टके की बात
- सचमुच ही फकीरा राम महतो जैसे महात्मा पुरूष तो जिंदगी भर ही गोदान से पहले इतना पुण्य कमा लेते हैं कि वैतरणी में गऊ माता खुद रास्ते की तमाम बाधाएं हटाती उनके आगे- आगे चलती है और स्वर्ग की परियां उनके ऊपर चंवर डुलाती रहती हैं। “होरी के मामा हरिभगत दास ने गर्व से कहा। उसने आगे
Information
| Format | Paperback , |
|---|---|
| ISBN No. | 9789395773447 |
| Publication date | 05 August 2023 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 312 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior |