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Kuch Baaki Tha

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कुछ बाकी था' मेरे द्वारा लिखित एक कथा संग्रह है यह मेरी दूसरी किताब है, इस किताब के माध्यम से मैंने लोगों तक अपने विचारों को पहुँचाने का एक छोटा सा प्रयास किया है। अब यह सार्थक कितना होता है, ये वक्त बतायेगा, पर उम्मीद यही है मेरी की मेरे पाठकों ने जितना स्नेह मेरे प्रथम काव्य संग्रह ''मेरा मन एक परिंदा'' को दिया उतना ही प्रेम वह मेरे कथा संग्रह ''कुछ बाकी था'' को भी देंगे। मैं अपने प्रकाशक रिगी पब्लिकेशन का भी दिल से आभार व्यक्त करना चाहूंगी की उन्होंने मेरे विचारों को पुस्तक के रूप में आधार प्रदान किया। मेरा कथा संग्रह न कोई आरोप लगाता न किसी को गलत ठहराता बस स्वतंत्र विचारों का प्रणोता है। स्वतंत्र सोच की राह दिखाता ! अंकिता जैन

Product Information

कुछ बाकी था' मेरे द्वारा लिखित एक कथा संग्रह है यह मेरी दूसरी किताब है, इस किताब के माध्यम से मैंने लोगों तक अपने विचारों को पहुँचाने का एक छोटा सा प्रयास किया है। 

अब यह सार्थक कितना होता है, ये वक्त बतायेगा, पर उम्मीद यही है मेरी की मेरे पाठकों ने जितना स्नेह मेरे प्रथम काव्य संग्रह ''मेरा मन एक परिंदा'' को दिया उतना ही प्रेम वह मेरे कथा संग्रह ''कुछ बाकी था'' को भी देंगे। 

मैं अपने प्रकाशक रिगी पब्लिकेशन का भी दिल से आभार व्यक्त करना चाहूंगी की उन्होंने मेरे विचारों को पुस्तक के रूप में आधार प्रदान किया। 
मेरा कथा संग्रह न कोई आरोप लगाता न किसी को गलत ठहराता बस स्वतंत्र विचारों का प्रणोता है। स्वतंत्र सोच की राह दिखाता !  

अंकिता जैन 

 


Keypoints:

  • स्वतंत्र विचारों का समर्थन: इस किताब की हर कहानी स्वतंत्र सोच और विचारों की स्वतंत्रता पर आधारित है।
  • भावनात्मक और गहराई से जुड़ी कहानियाँ: यह पुस्तक जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं को गहराई से दर्शाती है।
  • सरल और सजीव भाषा: पुस्तक की भाषा सादगीपूर्ण है
  • जो हर उम्र के पाठकों को समझने में आसान होती है।
  • प्रेरणादायक कथाएँ: यह संग्रह पाठकों को आत्मचिंतन करने और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
  • लेखिका का दूसरा संग्रह: 'कुछ बाकी था' लेखिका अंकिता जैन की दूसरी पुस्तक है
  • जिसे रिगी पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।

Bullets:

  • जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों और भावनाओं को सजीव रूप से प्रस्तुत करता है।
  • स्वतंत्र विचारों और सोच पर आधारित कथाओं का संग्रह।
  • सरल और सजीव भाषा में लिखा गया, जिससे पाठक आसानी से जुड़ सकते हैं।
  • प्रेरणादायक और संवेदनशील कथाएँ जो आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं।
  • अंकिता जैन की दूसरी पुस्तक, जो पाठकों के दिल को छू जाती है।

Information

Format Paperback , EBook
ISBN No. 9789386447951
Publication date 22 January 2019
Publisher Rigi Publication
Publication City/Country: India
Language Hindi
Book Pages 72
Book Size 5.5" x 8.5"
Book Interior Black & white interior with white paper (Premium Quality)

About Author

अंकिता जैन एक उभरती हुई लेखिका हैं, जिनका साहित्यिक सफर काव्य और कथाओं के माध्यम से शुरू हुआ। उनकी पहली पुस्तक 'मेरा मन एक परिंदा' एक काव्य संग्रह थी, जिसे पाठकों द्वारा खूब सराहा गया। उनकी लेखनी में सादगी के साथ-साथ गहराई भी दिखाई देती है, जो पाठकों को आसानी से अपने विचारों के साथ जोड़ने में सक्षम होती है। उनकी दूसरी पुस्तक 'कुछ बाकी था' एक कथा संग्रह है, जिसमें उन्होंने स्वतंत्र सोच और जीवन के अनुभवों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। अंकिता जैन का लेखन विचारों की स्वतंत्रता, भावनाओं की अभिव्यक्ति, और जीवन के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण पर आधारित है।

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