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"आईना ऐ निराला" – एक ऐसी पुस्तक जो आपको सत्य, ईश्वर और आत्मा के बारे में गहन विचार करने पर मजबूर कर देगी। लेखक सत्यवीर 'निराला' ने इस पुस्तक में जीवन के मूलभूत प्रश्नों को इतने सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है कि पढ़ने के बाद आपका दृष्टिकोण ही बदल जाएगा।
प्रमुख विशेषताएँ:
✔ चिंतनशील प्रश्न: "क्या सत्य इतना सरल हो सकता है?", "क्या प्रेम ही ईश्वर है?" जैसे गहन सवालों पर विचार।
✔ आध्यात्मिक मार्गदर्शन: ईश्वर प्राप्ति, गुरु-शिष्य संबंध और आत्मज्ञान की सरल व्याख्या।
✔ सरल भाषा: हर पाठक के लिए समझने में आसान, पर गहन अर्थों से भरपूर।
✔ आत्म-खोज को प्रेरित करती है: पाठक अपने विश्वासों और मूल्यों पर पुनर्विचार करने लगते हैं।
✔ व्यावहारिक ज्ञान: जीवन में उतारने योग्य सीख जो आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर लाभकारी है।
यह पुस्तक किसके लिए है?
आध्यात्मिक साधक जो ईश्वर और सत्य को समझना चाहते हैं।
जिज्ञासु पाठक जो जीवन के गूढ़ प्रश्नों के उत्तर ढूँढ रहे हैं।
व्यक्तित्व विकास में रुचि रखने वाले जो अपने अंदर की खोज करना चाहते हैं।
"आईना ऐ निराला" को पढ़कर अपने अस्तित्व के सच से रूबरू हों!
Keypoints:
- जीवन के मूलभूत प्रश्नों पर गहन चिंतन – "क्या ईश्वर की प्राप्ति इतनी आसान है?"
- सरल भाषा में गूढ़ आध्यात्मिक सत्य – हर उम्र के पाठकों के लिए उपयुक्त।
- आत्म-खोज और आध्यात्मिक जागरण को प्रेरित करने वाली पुस्तक।
- गुरु-शिष्य संबंध
- प्रेम और सत्य पर नई दृष्टि।
- धार्मिक और दार्शनिक विषयों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
Bullets:
- "क्या सचमुच प्रेम ही ईश्वर है?" – इस पुस्तक में छिपे हैं जीवन के बड़े सवालों के जवाब।
- आध्यात्मिक साधकों के लिए एक अनमोल गाइड – सत्य की खोज का सरल मार्ग।
- जीवन के अर्थ को समझने की दिशा में पहला कदम।
- गुरु कौन है? ईश्वर कैसे मिलता है? – इन प्रश्नों के उत्तर जानकर चौंक जाएँगे आप!
- एक बार पढ़ने के बाद जीवन का नजरिया ही बदल जाता है।
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789388393140 |
| Publication date | 15 March 2019 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 368 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
सत्यवीर 'निराला' (जन्म: 24 अक्टूबर 1956, निगाणा गाँव, रोहतक, हरियाणा) एक आध्यात्मिक विचारक, लेखक और संगीतकार हैं। हरियाणा सरकार के जल आपूर्ति विभाग में सेवा देने के बाद, उन्होंने अपना जीवन आध्यात्मिक साधना और साहित्य को समर्पित कर दिया। 1992 में निरंकारी मिशन के परम संत श्री निर्मल जोशी जी द्वारा उन्हें "निराला" की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनकी रचनाएँ मानव धर्म, भक्ति और आत्म-अन्वेषण पर केंद्रित हैं, जो पाठकों को जीवन के गहन सत्यों से परिचित कराती हैं।