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सिख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव जी केवल एक धर्म संस्थापक नहीं, बल्कि युग-परिवर्तन के अग्रदूत थे। उन्होंने मानवता, समानता और भाईचारे का ऐसा संदेश दिया, जो आज भी पूरे विश्व में प्रासंगिक है।
“करांति के अग्रदूत गुरु नानक” पुस्तक में डॉ. जसविंदर कौर बिंद्रा ने गुरु नानक के विचारों, शिक्षाओं, दार्शनिक सिद्धांतों और बाणी का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक केवल धार्मिक अध्ययन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और आध्यात्मिक क्रांति का दस्तावेज है।
गुरु नानक ने स्वयं को ‘सिख’ कहा — अर्थात् सदैव सीखते रहने वाला। संवाद, विचार-विमर्श और अनुभव के माध्यम से उन्होंने सत्य को समझने और समझाने का मार्ग अपनाया। यह पुस्तक उसी जीवंत संवाद परंपरा को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है।
इस पुस्तक में पाठक जान पाएंगे:
गुरु नानक की क्रांतिकारी सोच
सर्वव्यापी परमात्मा की अवधारणा
मानवता और समानता का संदेश
धर्मों के बीच संवाद की परंपरा
समाज सुधार की ऐतिहासिक दृष्टि
166 पृष्ठों में समाहित यह कृति आध्यात्मिक जिज्ञासुओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और धार्मिक अध्ययन में रुचि रखने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
यह पुस्तक Rigi Publication द्वारा प्रकाशित है और Amazon, Flipkart तथा www.rigipublication.com पर Paperback व eBook में उपलब्ध है। eBook रेंट सुविधा विशेष रूप से RigiPublication.com पर उपलब्ध है।
Keypoints:
- गुरु नानक के दर्शन और शिक्षाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन
- सिख धर्म की मूल अवधारणाओं की स्पष्ट व्याख्या
- शोधपरक एवं संदर्भयुक्त सामग्री
- सरल और प्रभावशाली भाषा
- Paperback एवं eBook दोनों संस्करण उपलब्ध
Bullets:
- गुरु नानक के दर्शन और शिक्षाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन
- सिख धर्म की मूल अवधारणाओं की स्पष्ट व्याख्या
- शोधपरक एवं संदर्भयुक्त सामग्री
- सरल और प्रभावशाली भाषा
- Paperback एवं eBook दोनों संस्करण उपलब्ध
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789363882379 |
| Publication date | 13 February 2026 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 166 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
डॉ. जसविंदर कौर बिंद्रा एक प्रतिष्ठित विदुषी, शोधकर्ता और आध्यात्मिक चिंतक हैं। उन्होंने भारतीय दर्शन, सिख धर्म और सामाजिक चिंतन पर गहन अध्ययन किया है। उनकी लेखनी में शोध की गंभीरता, आध्यात्मिक संवेदनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता स्पष्ट झलकती है।
यह पुस्तक उनके विद्वतापूर्ण अध्ययन और गुरु नानक के प्रति गहरी श्रद्धा का सशक्त उदाहरण है।