Product Information
“जय हिंद की पुकार” संजीव द्वारा रचित एक गहन, भावपूर्ण और देशभक्ति से ओतप्रोत कविता संग्रह है, जो हर भारतीय के हृदय में गूंजने वाली भावनाओं का उज्जवल स्वर है। जब शब्द मातृभूमि की मिट्टी से जन्म लेते हैं, तो वे केवल कविता नहीं रहते — वे एक प्रण, एक आह्वान, और एक शपथ बन जाते हैं।
इस संग्रह की कविताएँ भारत की शान, सीमा पर तैनात वीर सैनिकों की निर्भीकता, किसान की मिट्टी से सनी मेहनत, और भारत माँ के स्नेहिल आंचल की गरिमा दर्शाती हैं। हर पंक्ति में देशभक्त का सम्मान, शौर्य की चमक और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम छुपा है। यह पुस्तक यह याद दिलाती है कि भारत केवल एक नक्शे की रेखा नहीं है; वह अपने लोगों के साहस, त्याग, समर्पण और गौरव से जीवित है।
यह कविता संग्रह उन सभी के लिए समर्पित है –
जो भारत से दिल से, कर्म से और शब्दों से प्रेम करते हैं।
Rigi Publication की वैश्विक पहुंच के साथ यह पुस्तक पेपरबैक, ईबुक और ईबुक ऑन रेंट के रूप में उपलब्ध है, जिससे यह देश-विदेश दोनों में आसानी से पढ़ी जा सकती है।
Keypoints:
- 75+ देशभक्ति से ओतप्रोत हिन्दी कविताओं का संकलन
- शौर्य, समर्पण, मातृभूमि प्रेम और वीरता की अभिव्यक्ति
- सेना, किसान, और नागरिकों के अनुभवों से प्रेरित कविताएँ
- Rigi Publication द्वारा गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन
- पेपरबैक, ईबुक और ईबुक-ऑन-रेंट रूप में उपलब्ध
Bullets:
- देशभक्ति की भावनाओं को जागृत करने वाला कविता संग्रह
- हर भारतीय के दिल को छूने वाली कविताएँ
- सैनिकों के त्याग और गौरव को सलाम
- सरल भाषा में गहन भावनात्मक अनुभव
- सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए उपयुक्त
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789363885493 |
| Publication date | 26 January 2026 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 172 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
संजीव एक संवेदनशील और देशभक्ति भावना से परिपूर्ण कवि हैं, जिनकी लेखनी मातृभूमि की मिट्टी की सुगंध से जन्म लेती है। उनकी कविताएँ सिर्फ शब्द नहीं हैं, बल्कि भारत की आत्मा की अनुगूँज हैं — जहाँ हर शेर में शौर्य की शपथ, सैनिक का पसीना और माँ की दुआ बसती है।
संजीव की रचनाएँ भावनाओं का अनोखा संगम हैं। वे अपने शब्दों में इतिहास की ज्वाला, वर्तमान का साहस और भविष्य की आशा को संयोजित करते हैं। उनकी कविताएँ राष्ट्र की शान, वीरों की गाथा और भारत के प्रति गर्व की अभिव्यक्ति हैं। “जय हिंद की पुकार” उनकी इसी सृजन-यात्रा का संकलन है जहां देशभक्ति, मानवीय करुणा और आत्म-विश्वास एक स्वर में गूँजते हैं।