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Kahaniyon Ki Chaupal – Stories from the Soul of Rural India By Ramveer Singh "Rahgeer" | Best Hindi Rural Story Collection | Rigi Publication

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“कहानियों की चौपाल” केवल एक कहानी संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण जीवन की आत्मा से जुड़ा हुआ एक जीवंत साहित्यिक अनुभव है। प्रसिद्ध साहित्यकार रामवीर सिंह ‘राहगीर’ द्वारा लिखित यह पुस्तक गाँव की मिट्टी की खुशबू, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक संघर्षों, रिश्तों की सादगी और जीवन के गहरे सत्य को अत्यंत सहज एवं प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करती है। इस संग्रह की कहानियाँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि पाठकों को आत्मबोध, सामाजिक जिम्मेदारी, मानवीय मूल्यों और जीवन की वास्तविकताओं से जोड़ती हैं। पुस्तक में गाँव और शहर के बीच बढ़ती दूरी, बदलते सामाजिक मूल्य, इंसानियत, कर्तव्यबोध, नैतिकता और भारतीय संस्कृति की झलक अत्यंत मार्मिक रूप से दिखाई गई है। लेखक ने अपने अनुभवों और समाज के वास्तविक चित्रण को इस प्रकार प्रस्तुत किया है कि हर पाठक स्वयं को इन कहानियों से जुड़ा हुआ महसूस करता है। “शान-शौकत”, “सब तेरी माया है”, “गौरैया कहाँ?”, “कर भला, तो हो भला” जैसी कहानियाँ पाठकों को भावनात्मक रूप से झकझोरने के साथ-साथ जीवन का सकारात्मक संदेश भी देती हैं। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जो प्रेमचंद, फणीश्वरनाथ रेणु और भारतीय ग्रामीण साहित्य की परंपरा को पसंद करते हैं। सरल भाषा, गहरी संवेदनाएँ और सामाजिक सरोकार इस पुस्तक को हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनमोल कृति बनाते हैं।

Product Information

“कहानियों की चौपाल” केवल एक कहानी संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण जीवन की आत्मा से जुड़ा हुआ एक जीवंत साहित्यिक अनुभव है। प्रसिद्ध साहित्यकार रामवीर सिंह ‘राहगीर’ द्वारा लिखित यह पुस्तक गाँव की मिट्टी की खुशबू, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक संघर्षों, रिश्तों की सादगी और जीवन के गहरे सत्य को अत्यंत सहज एवं प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करती है।

इस संग्रह की कहानियाँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि पाठकों को आत्मबोध, सामाजिक जिम्मेदारी, मानवीय मूल्यों और जीवन की वास्तविकताओं से जोड़ती हैं। पुस्तक में गाँव और शहर के बीच बढ़ती दूरी, बदलते सामाजिक मूल्य, इंसानियत, कर्तव्यबोध, नैतिकता और भारतीय संस्कृति की झलक अत्यंत मार्मिक रूप से दिखाई गई है।

लेखक ने अपने अनुभवों और समाज के वास्तविक चित्रण को इस प्रकार प्रस्तुत किया है कि हर पाठक स्वयं को इन कहानियों से जुड़ा हुआ महसूस करता है। “शान-शौकत”, “सब तेरी माया है”, “गौरैया कहाँ?”, “कर भला, तो हो भला” जैसी कहानियाँ पाठकों को भावनात्मक रूप से झकझोरने के साथ-साथ जीवन का सकारात्मक संदेश भी देती हैं।

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जो प्रेमचंद, फणीश्वरनाथ रेणु और भारतीय ग्रामीण साहित्य की परंपरा को पसंद करते हैं। सरल भाषा, गहरी संवेदनाएँ और सामाजिक सरोकार इस पुस्तक को हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनमोल कृति बनाते हैं।


Keypoints:

  • भारतीय ग्रामीण जीवन और सामाजिक यथार्थ पर आधारित प्रभावशाली कहानी संग्रह। 
  •  सरल, सहज और भावनात्मक हिंदी भाषा में लिखी गई कहानियाँ। 
  •  मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन का अद्भुत चित्रण। 
  •  हिंदी साहित्य प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए उत्कृष्ट पठनीय पुस्तक। 
  •  Paperback, eBook एवं eBook Rental में उपलब्ध।

Bullets:

  •  गाँव और भारतीय संस्कृति की आत्मा को दर्शाती प्रेरक कहानियाँ।
  •  सामाजिक समस्याओं और मानवीय मूल्यों का यथार्थ चित्रण।
  •  सरल भाषा में गहरी जीवन सीख देने वाला कहानी संग्रह।
  •  प्रेमचंद शैली के साहित्य प्रेमियों के लिए विशेष पुस्तक।
  •  भावनात्मक, प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक हिंदी साहित्य। 

Information

Format Paperback , EBook
ISBN No. 9789363886254
Publication date 25 May 2026
Publisher Rigi Publication
Publication City/Country: India
Language Hindi
Book Pages 102
Book Size 5.5" x 8.5"
Book Interior Black & white interior with white paper (Premium Quality)

About Author

रामवीर सिंह ‘राहगीर’ हिंदी साहित्य जगत के एक संवेदनशील एवं अनुभवी साहित्यकार हैं, जिनकी लेखनी भारतीय ग्रामीण जीवन, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के ग्राम पीपलहेड़ा में जन्मे रामवीर सिंह ‘राहगीर’ ने अपने साहित्यिक जीवन में कहानी, नाटक, कविता, यात्रा संस्मरण और सामाजिक लेखन के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है।

उन्होंने “योद्धा संन्यासी स्वामी विवेकानंद”, “वन कन्या”, “पंचायत द ऑनर किलिंग”, “पैसों वाला गद्दा” तथा “पाँच आदर्श नाटक” जैसी महत्वपूर्ण कृतियाँ लिखीं। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, ग्रामीण जीवन, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं की गहरी छाप दिखाई देती है।

आईआईटी रुड़की से अधीक्षक पद से सेवानिवृत्त होने के पश्चात भी वे साहित्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उनकी भाषा सरल, सहज और जनमानस से जुड़ी हुई है, जिसके कारण उनकी कहानियाँ सीधे पाठकों के हृदय तक पहुँचती हैं।

Rigi Publication द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तकें भारत सहित अंतरराष्ट्रीय पाठकों के बीच भी लोकप्रिय हो रही हैं।

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