Product Information
“क्या दुनिया के 90% लोग बिहारी हैं” एक विचारोत्तेजक एवं शोधपरक पुस्तक है जो भारतीय सभ्यता, बिहार की ऐतिहासिक भूमिका और वैश्विक सांस्कृतिक संबंधों पर नए दृष्टिकोण से विमर्श प्रस्तुत करती है।
लेखक अविनाश शर्मा प्राचीन ग्रंथों, ऐतिहासिक संदर्भों और अंतरराष्ट्रीय विचारकों के उल्लेखों के आधार पर यह प्रश्न उठाते हैं कि भारत, विशेषकर बिहार (प्राचीन मगध), विश्व सभ्यता के विकास में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
पुस्तक में इतिहास की पारंपरिक धारणाओं पर प्रश्न उठाते हुए सांस्कृतिक पहचान, संस्कृत भाषा की महत्ता और भारतीय बौद्धिक विरासत को पुनः समझने का प्रयास किया गया है। यह पुस्तक पाठकों को इतिहास को नए नजरिये से पढ़ने और समझने के लिए प्रेरित करती है।
यह 90 पृष्ठों की सशक्त पुस्तक शोध-रुचि रखने वाले पाठकों, इतिहास प्रेमियों और सांस्कृतिक विमर्श में रुचि रखने वालों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
यह पुस्तक Rigi Publication द्वारा प्रकाशित है और Paperback, eBook एवं Rental (rigipublication.com) पर उपलब्ध है।
Keypoints:
- भारतीय इतिहास पर वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने वाली पुस्तक
- प्राचीन ग्रंथों एवं ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित चिंतन
- 90 पृष्ठों में सशक्त और संक्षिप्त प्रस्तुति
- इतिहास, संस्कृति और पहचान पर गंभीर विमर्श
- Rigi Publication द्वारा प्रकाशित – Paperback एवं eBook में उपलब्ध
Bullets:
- पारंपरिक इतिहास की धारणाओं को चुनौती देती पुस्तक
- बिहार की प्राचीन बौद्धिक परंपरा पर केंद्रित
- संस्कृत एवं आर्य संस्कृति पर वैचारिक चर्चा
- शोधपरक एवं विचारोत्तेजक प्रस्तुति
- Rigi Publication का विशिष्ट प्रकाशन
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789363886810 |
| Publication date | 26 February 2026 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 90 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
अविनाश शर्मा एक टेक्नोक्रेट, उद्योगकर्मी और स्वतंत्र शोधकर्ता हैं। बिहार के सासाराम में जन्मे तथा वर्तमान में मुंबई में निवासरत लेखक को प्राचीन भारतीय इतिहास, साहित्य और सामाजिक चिंतन में विशेष रुचि है।
विगत दस वर्षों से उन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों, ग्रंथों और सांस्कृतिक संदर्भों का अध्ययन किया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ऐतिहासिक जिज्ञासा का संयोजन उनके लेखन की विशेषता है।
उनका उद्देश्य भारतीय सभ्यता और विशेषकर बिहार की प्राचीन बौद्धिक विरासत पर संवाद को पुनर्जीवित करना है।