Product Information
"अयोध्या नरेश राजा राम द्वारा माता सीता का त्याग" एक गहन और शोधपरक पौराणिक ग्रंथ है, जो माता सीता के जीवन के उस अछूते पहलू पर प्रकाश डालता है, जिस पर कम चर्चा हुई है। इस पुस्तक में श्रीराम द्वारा माता सीता के त्याग, उनकी अग्निपरीक्षा, वनगमन, महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में जीवन, लव-कुश का पालन-पोषण एवं राम के यज्ञ में सीता के अंतिम शपथ ग्रहण का विस्तार से वर्णन किया गया है।
यह ग्रंथ तुलसीदास एवं महर्षि वाल्मीकि के मूल ग्रंथों से प्रेरित होकर आधुनिक दृष्टिकोण से लिखा गया है, जिससे पाठकों को न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों की भी गहरी समझ प्राप्त होती है। माता सीता के आदर्श, त्याग, धैर्य एवं नारी गरिमा की गाथा इस पुस्तक में सजीव हो उठती है।
यदि आप रामायण के गूढ़ रहस्यों, धार्मिक इतिहास एवं भारतीय संस्कृति में नारी की भूमिका को गहराई से समझना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए एक अमूल्य ग्रंथ साबित होगी।
Keypoints:
- ✔️ माता सीता के जीवन का अनछुआ एवं प्रामाणिक वर्णन
- ✔️ वाल्मीकि रामायण एवं तुलसी रामायण के संदर्भों पर आधारित
- ✔️ भारतीय संस्कृति में नारी सम्मान एवं आदर्श नारीत्व की व्याख्या
- ✔️ धर्म
- इतिहास एवं समाजशास्त्र का अनूठा समावेश
- ✔️ आध्यात्मिक चिंतन एवं आत्ममंथन को प्रेरित करने वाली रचना
Bullets:
- 🔹 रामायण के एक महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित प्रसंग की गहराई से विवेचना
- 🔹 माता सीता के त्याग, धैर्य एवं शक्ति को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर
- 🔹 रामायण के मूल स्रोतों से प्रमाणित संदर्भों के साथ विश्लेषणात्मक लेखन
- 🔹 समाज में स्त्री के सम्मान एवं पवित्रता की अवधारणा पर शोधपरक विमर्श
- 🔹 धर्म, न्याय एवं कर्तव्य के मध्य संघर्ष को समझने के लिए एक अनमोल ग्रंथ
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789363885103 |
| Publication date | 12 March 2025 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 60 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
पंडित मधुसूदन त्रिपाठी जी एक प्रतिष्ठित धार्मिक एवं पौराणिक लेखक हैं, जिन्होंने सनातन धर्म, रामायण, महाभारत एवं भारतीय संस्कृति पर गहन शोध किया है। वे वर्षों से धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन एवं लेखन कर रहे हैं।
उनकी लेखनी माता सीता के जीवन के उस पक्ष को उजागर करती है, जिसे समझे बिना रामायण की संपूर्णता अधूरी रहती है। यह पुस्तक उनकी विद्वता एवं सनातन संस्कृति की गहरी पकड़ का प्रमाण है।
वे वेदों, उपनिषदों, रामायण एवं अन्य धार्मिक ग्रंथों के विशेषज्ञ हैं और पाठकों को आध्यात्मिक जागृति के मार्ग पर अग्रसर करने का प्रयास कर रहे हैं।