Product Information
“मुहूर्त महुरा” एक अत्यंत गूढ़, रहस्यमयी और आध्यात्मिक ग्रंथ है, जो सनातन धर्म की उन भविष्यवाणियों को पाठकों के समक्ष लाता है, जिनका उल्लेख प्राचीन ओड़िया भविष्य ग्रंथों, पंचसखा परंपरा और संत साहित्य में मिलता है।
गीता के शाश्वत वचनों के अनुसार—
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…”
जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब ईश्वर स्वयं अवतार लेकर धर्म की पुनः स्थापना करते हैं।
मुहूर्त महुरा इसी दिव्य सत्य की खोज और प्रस्तुति है।
इस पुस्तक में 1984 से 1992 के बीच ओड़िशा के महांगा ग्राम में प्राप्त आध्यात्मिक अनुभवों, संत-संगति और भविष्य ग्रंथों के अध्ययन के आधार पर उन तथ्यों को संकलित किया गया है, जो आने वाले युग, धर्म की स्थिति और मानव चेतना के परिवर्तन की ओर संकेत करते हैं।
यह पुस्तक केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाला दस्तावेज़ है—जो पाठक को आत्मचिंतन, धर्मबोध और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
Keypoints:
- सनातन धर्म की प्राचीन भविष्यवाणियों पर आधारित
- पंचसखा परंपरा एवं ओड़िशा के भविष्य ग्रंथों का संदर्भ
- सरल, प्रभावी और चिंतनशील भाषा
- आध्यात्मिक जिज्ञासुओं एवं साधकों के लिए उपयुक्त
- Rigi Publication द्वारा प्रमाणिक प्रस्तुति
Bullets:
- सनातन धर्म की प्राचीन भविष्यवाणियों पर आधारित
- पंचसखा परंपरा एवं ओड़िशा के भविष्य ग्रंथों का संदर्भ
- सरल, प्रभावी और चिंतनशील भाषा
- आध्यात्मिक जिज्ञासुओं एवं साधकों के लिए उपयुक्त
- Rigi Publication द्वारा प्रमाणिक प्रस्तुति
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789363889385 |
| Publication date | 05 February 2026 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 50 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
अनिल चावला एक गहन आध्यात्मिक दृष्टि वाले लेखक हैं, जिनकी रुचि सनातन धर्म, भारतीय दर्शन और भविष्यवाणी साहित्य में रही है।
उन्होंने “मुहूर्त महुरा” के माध्यम से उन दिव्य तथ्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है, जो सामान्य पाठकों के लिए प्रायः दुर्लभ और कठिन माने जाते हैं।
उनकी लेखनी का उद्देश्य किसी भय या अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि धर्म, विवेक और आत्म-जागरण की ओर मानवता को उन्मुख करना है।
अनिल चावला का विश्वास है—
“धर्म कोई परंपरा नहीं, बल्कि चेतना की अवस्था है।”