Product Information
"Vishavyudh - 3: War Against Life" एक रोमांचक और चिंतनशील काल्पनिक कथा है, जो आज के समय की सबसे गंभीर समस्याओं पर एक गहरी दृष्टि डालती है। यह कहानी उस खतरनाक मोड़ पर दुनिया की तस्वीर खींचती है, जहाँ मानवता अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। आतंकवाद, बेरोजगारी, भुखमरी, और अशिक्षा जैसी भीषण समस्याएँ इस पुस्तक की केंद्रीय विषयवस्तु हैं, जो न केवल समाज को अंदर तक झकझोरती हैं, बल्कि एक आने वाले विध्वंस की चेतावनी भी देती हैं।
इस पुस्तक में छात्रों द्वारा की जाने वाली आत्महत्याओं के कारणों पर भी प्रकाश डाला गया है, साथ ही उनके समाधान के ठोस सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। लेखक ने इन मुद्दों को बहुत ही संवेदनशीलता और यथार्थ के साथ पेश किया है, जिससे पाठक भावनात्मक रूप से जुड़ता है।
यह पुस्तक न केवल एक काल्पनिक कथा है, बल्कि समाज के लिए एक आइना भी है जो हमें सोचने पर मजबूर करता है—क्या हम इस विनाश को रोक सकते हैं? क्या मानवता अपने अस्तित्व की रक्षा कर पाएगी?
Keypoints:
- 🌍 वैश्विक समस्याओं पर केंद्रित – आतंकवाद
- बेरोजगारी
- भुखमरी और आत्महत्या जैसे मुद्दों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया गया है।
- ✍️ शक्तिशाली लेखन शैली – लेखक की भाषा सरल
- प्रभावशाली और पाठक को गहराई से प्रभावित करने वाली है।
- 🔥 सोच को झकझोर देने वाला कथानक – कहानी पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है और समाज की सच्चाई से अवगत कराती है।
- 📘 युवाओं के लिए प्रेरणादायक – छात्र आत्महत्याओं की समस्या पर प्रकाश डालती हुई यह पुस्तक समाधान की राह दिखाती है।
- 🕊️ काल्पनिकता में यथार्थ का समावेश – कल्पना के माध्यम से आज के यथार्थ को दर्शाने का अनोखा प्रयास।
Bullets:
- यह पुस्तक मानवता के अस्तित्व के संघर्ष की कहानी कहती है।
- आतंकवाद और सामाजिक विघटन के प्रभाव को गहराई से उजागर किया गया है।
- विद्यार्थियों की मानसिक चुनौतियों और आत्महत्या की प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला गया है।
- कहानी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि क्या हम विनाश की ओर बढ़ रहे हैं?
- “Vishavyudh - 3” एक कल्पनात्मक कथा है जो वर्तमान दुनिया की सच्चाइयों से साक्षात्कार कराती है।
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789386447180 |
| Publication date | 04 May 2017 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 324 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
राजकमल जोलंदावाला, एक संवेदनशील और जागरूक लेखक हैं, जो समाज के ज्वलंत मुद्दों को अपनी लेखनी के माध्यम से सबके सामने लाते हैं। उन्होंने जीवन के कड़वे यथार्थ, युवाओं की मानसिक स्थितियों, और वैश्विक संकटों को बेहद प्रभावशाली ढंग से अपनी कहानियों में पिरोया है।
"Vishavyudh" श्रृंखला उनकी सामाजिक और वैचारिक चेतना का प्रमाण है। राजकमल जी का लेखन न केवल मनोरंजन करता है, बल्कि पाठकों को भीतर तक झकझोरता है और उन्हें सोचने पर विवश करता है। उनकी लेखनी में यथार्थ, कल्पना और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।