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“अग्नि समाधि: अनकहा सच” एक ऐसी रौंगटे खड़े कर देने वाली सच्ची घटना पर आधारित किताब है, जो आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा को धुंधला कर देती है। यह कहानी मध्य भारत के चंबल अंचल में घटी उस ऐतिहासिक घटना को सामने लाती है, जिसमें एक बाबा ने हजारों लोगों की आंखों के सामने अपने ही शरीर से निकली अग्नि में समाधि ली।
ये किताब न केवल उस घटना का दस्तावेज है, बल्कि समाज, मीडिया, प्रशासन और आस्था के बीच के संघर्ष को भी दर्शाती है। क्या यह एक चमत्कार था? क्या यह एक सोची-समझी साजिश थी? पुलिस, मीडिया और सरकार की मिलीभगत या सच्चे साधु का बलिदान?
इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए यह किताब पढ़ना बेहद जरूरी है।
Keypoints:
- सत्य घटना पर आधारित रहस्यमयी कथा
- आस्था और अंधविश्वास की गहराई को समझाने वाली पुस्तक
- भारत की पहली लाइव समाधि की घटना का विवरण
- सशक्त जांच-पड़ताल और मीडिया रिपोर्टिंग का विश्लेषण
- प्रभावशाली भाषा में लिखी गई एक दुर्लभ डॉक्यूमेंट्री शैली की पुस्तक
Bullets:
- चंबल के एक गांव की वास्तविक घटना पर आधारित थ्रिलर कथा।
- बाबा की रहस्यमयी अग्नि समाधि, जिसे हजारों लोगों ने देखा।
- पुलिस, मीडिया और प्रशासन की भूमिका की खुली समीक्षा।
- पढ़ने पर आस्था, विज्ञान और सोच के बीच संतुलन बनाने की प्रेरणा देती है।
- एक बार पढ़ना शुरू किया तो खत्म किए बिना छोड़ नहीं पाएंगे।
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789386447289 |
| Publication date | 29 July 2017 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 182 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
विजय तिवारी "बग्गी" एक सच्चे पत्रकार, कथाकार और खोजी लेखक हैं, जिन्होंने सामाजिक और धार्मिक रहस्यों को उजागर करने में विशेष रुचि दिखाई है। वो वर्षों से उन कहानियों को सामने लाने का काम कर रहे हैं जो समाज में चर्चा तो बनती हैं, पर उनकी सच्चाई कभी सामने नहीं आती। "अग्नि समाधि: अनकहा सच" उनकी इसी कोशिश का एक साहसी और संवेदनशील दस्तावेज है।