Product Information
“दबी-कुचली घास की वो पगडंडियां” लेखक किशोर परिहार का एक संवेदनशील और विचारोत्तेजक हिंदी कहानी संग्रह है, जो मानव जीवन की छोटी-छोटी यात्राओं, अनुभवों और भावनाओं को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
जैसे किसी पहाड़ या जंगल में धीरे-धीरे लोगों के चलने से एक पगडंडी बन जाती है, वैसे ही जीवन के अनुभव, संघर्ष और विचार धीरे-धीरे मन में जन्म लेते हैं और अंततः कहानियों का रूप धारण कर लेते हैं। इस पुस्तक की कहानियां भी ठीक ऐसी ही पगडंडियों की तरह हैं—जो अनगिनत अनुभवों और जीवन यात्राओं के निशानों से बनी हैं।
लेखक ने इस पुस्तक में जीवन के उन पहलुओं को उजागर किया है जो अक्सर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में छिपे रह जाते हैं। कभी यह कहानियां समाज की सच्चाइयों को सामने लाती हैं, तो कभी मानव मन की गहराइयों को स्पर्श करती हैं। हर कहानी पाठक को सोचने, महसूस करने और जीवन के नए अर्थ खोजने के लिए प्रेरित करती है।
यह पुस्तक केवल कहानियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह मानव अनुभवों, विचारों और जीवन यात्राओं का दस्तावेज़ है। लेखक ने सरल और प्रभावशाली भाषा में उन भावनाओं को शब्द दिए हैं जो धीरे-धीरे मन में जन्म लेती हैं और फिर साहित्य का रूप लेती हैं।
Rigi Publication द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक आधुनिक हिंदी साहित्य के पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है। जो पाठक संवेदनशील, विचारशील और जीवन से जुड़े साहित्य को पढ़ना पसंद करते हैं, उनके लिए यह पुस्तक विशेष रूप से उपयुक्त है।
यह पुस्तक Paperback और eBook दोनों रूपों में Amazon, Flipkart और RigiPublication.com पर उपलब्ध है।
साथ ही RigiPublication.com पर eBook को किराए (Rent) पर पढ़ने की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे पाठक इसे आसानी से पढ़ सकते हैं।
Keypoints:
- जीवन के अनुभवों पर आधारित प्रभावशाली हिंदी कहानी संग्रह।
- समाज, भावनाओं और मानवीय विचारों का संवेदनशील चित्रण।
- सरल भाषा में गहन साहित्यिक अभिव्यक्ति।
- आधुनिक हिंदी साहित्य के पाठकों के लिए उपयुक्त पुस्तक।
- Rigi Publication द्वारा प्रकाशित उत्कृष्ट साहित्यिक कृति।
Bullets:
- जीवन की सच्चाइयों और अनुभवों पर आधारित प्रेरक कहानियां
- संवेदनशील और विचारोत्तेजक हिंदी कहानी संग्रह
- मानव भावनाओं और सामाजिक यथार्थ का सुंदर चित्रण
- साहित्य प्रेमियों और हिंदी पाठकों के लिए विशेष पुस्तक
- Paperback और eBook दोनों रूपों में उपलब्ध
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789389540963 |
| Publication date | 12 January 2024 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 46 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper |
About Author
किशोर परिहार एक संवेदनशील हिंदी लेखक हैं, जिनकी लेखनी जीवन के अनुभवों, सामाजिक यथार्थ और मानवीय भावनाओं को गहराई से अभिव्यक्त करती है।
उनकी कहानियां साधारण जीवन की असाधारण सच्चाइयों को उजागर करती हैं। वे अपने लेखन के माध्यम से मानव मन की जटिलताओं, समाज की वास्तविकताओं और जीवन के संघर्षों को अत्यंत सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
उनकी पुस्तक “दबी-कुचली घास की वो पगडंडियां” जीवन की अनगिनत यात्राओं और अनुभवों से प्रेरित कहानियों का एक अनूठा संग्रह है, जो पाठकों को जीवन के छिपे हुए रास्तों से परिचित कराता है।
यह पुस्तक Rigi Publication द्वारा प्रकाशित की गई है, जो भारतीय लेखकों और साहित्य को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित है।