Product Information
“लहरों की जुबान, ख़ामोशियों का तराना” केवल एक कविता-संग्रह नहीं, बल्कि एक आंतरिक यात्रा है — जहाँ शब्दों से अधिक चुप्पियाँ बोलती हैं।
संजीव की यह 152 पृष्ठों की काव्य-यात्रा प्रेम, विरह, स्मृति, आत्मसंवाद और प्रकृति की सूक्ष्म संवेदनाओं को स्पर्श करती है। इस संग्रह की हर कविता एक लहर है — जो मन की गहराइयों से उठकर पाठक के हृदय-तट तक पहुँचती है।
यह पुस्तक उन भावों को शब्द देती है जिन्हें अक्सर हम महसूस तो करते हैं, पर कह नहीं पाते। यहाँ प्रेम है, पर शोर नहीं। यहाँ देश और प्रकृति का भाव है, पर नारा नहीं — केवल नाद है।
यह काव्य-संग्रह उन पाठकों के लिए है जो पढ़ते नहीं, महसूस करते हैं। जो पंक्तियों के बीच की चुप्पियों को भी सुनना जानते हैं।
Rigi Publication द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक पेपरबैक एवं ई-बुक रूप में उपलब्ध है। ई-बुक रेंट सुविधा विशेष रूप से RigiPublication.com पर उपलब्ध है।
Keypoints:
- प्रेम, मौन और आत्मसंवाद पर आधारित काव्य-संग्रह
- भावनात्मक एवं दार्शनिक गहराई
- प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं का संतुलित चित्रण
- 152 पृष्ठों की सघन साहित्यिक यात्रा
- पेपरबैक, ई-बुक और रेंट विकल्प उपलब्ध
Bullets:
- समकालीन हिंदी कविता का सशक्त संग्रह
- आत्मचिंतन और संवेदनशीलता से भरपूर रचनाएँ
- कविता प्रेमियों के लिए विशेष पठनीय
- संजीव की भावप्रवण एवं सूक्ष्म लेखन शैली
- Rigi Publication की साहित्यिक प्रस्तुति
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789363882362 |
| Publication date | 19 February 2026 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 152 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Color interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
संजीव एक संवेदनशील कवि, लेखक और संपादक हैं। उनकी लेखनी भावनाओं, आत्मचिंतन और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों से जन्म लेती है। वे शब्दों को केवल लिखते नहीं, उन्हें जीते हैं।
“लहरों की जुबान, ख़ामोशियों का तराना” में उन्होंने मौन को स्वर और तरंगों को अर्थ दिया है। उनकी कविताएँ पाठक को भीतर झाँकने का अवसर देती हैं।