Product Information
"Juthan Aur Dalit Sahitya" एक ऐसी किताब है जो भारतीय समाज के उपेक्षित वर्गों की सच्चाई को सामने लाने का प्रयास करती है। यह पुस्तक न केवल दलित साहित्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास पर प्रकाश डालती है, बल्कि समाज में फैले भेदभाव, छुआछूत और सामाजिक असमानता को भी गहराई से विश्लेषित करती है। लेखकों ने न केवल सैद्धांतिक दृष्टिकोण से विषय को प्रस्तुत किया है, बल्कि समकालीन उदाहरणों और संदर्भों के माध्यम से इसे और अधिक जीवंत बना दिया है। यह पुस्तक छात्रों, शोधार्थियों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए समान रूप से उपयोगी है।
Keypoints:
- दलित साहित्य और आत्मकथात्मक साहित्य का विश्लेषणात्मक अध्ययन
- शोध के दृष्टिकोण से प्रमाणिक सामग्री
- शिक्षकों
- छात्रों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ
- समकालीन सामाजिक संदर्भों से जुड़ा हुआ विमर्श
- उच्च स्तरीय भाषा और विचार समृद्ध लेखन
Bullets:
- आत्मकथा ‘जूठन’ के सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तृत विमर्श
- दलित साहित्य की वैचारिक, भावनात्मक और सामाजिक गहराई को उजागर करती पुस्तक
- अकादमिक पाठ्यक्रम में उपयोग हेतु आदर्श
- अनुसंधान, निबंध लेखन व साहित्य समीक्षा के लिए उपयुक्त
- सामाजिक न्याय और समानता के संदर्भ में विचारोत्तेजक सामग्री
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789386447111 |
| Publication date | 14 October 2017 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 70 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
ज्योति शर्मा एक प्रबुद्ध साहित्यकार और शोधकर्ता हैं, जो दलित विमर्श पर विशेष अध्ययन कर रही हैं।
डॉ. ओम प्रकाश नारायण द्विवेदी एक प्रख्यात आलोचक एवं समाजविज्ञानी हैं, जिनकी पहचान सामाजिक विषयों पर बेबाक लेखन के लिए की जाती है। दोनों लेखक समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों की पीड़ा को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।