Product Information
Samkaleen Punjabi Dalit Kahaniyan: संघर्ष, चेतना और पहचान की कहानियाँ दलित जीवन की सच्चाइयों, संघर्षों और आत्मसम्मान की पुकार को जीवंत करती है। इस संग्रह में शामिल 16 कहानियाँ दलित समाज के दर्द, अपमान, शोषण और उससे ऊपर उठकर हासिल किए गए अधिकार और सम्मान की गाथा को बयान करती हैं।
इन कहानियों में दलितों के आत्मसम्मान, शिक्षा के महत्व और सामाजिक चेतना की गहरी झलक मिलती है। स्वतंत्रता के बाद आए बदलाव, आरक्षण नीति और शिक्षा ने किस तरह उनके जीवन को नई दिशा दी – यह संग्रह उसी यात्रा को पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है।
हर कहानी समाज की कठोर वास्तविकताओं और दलित चेतना के उदय का आईना है। यह पुस्तक सिर्फ साहित्य नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का दस्तावेज़ है, जो आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष और आत्मसम्मान का मार्ग दिखाती है।
Keypoints:
- 16 समकालीन पंजाबी दलित कहानियों का संग्रह।
- शिक्षा
- संघर्ष और पहचान की वास्तविक कहानियाँ।
- डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा जैसी प्रतिष्ठित लेखिका द्वारा संपादित।
- समाज के बदलते स्वरूप और दलित चेतना का सशक्त दस्तावेज़।
- प्रेरणादायक और यथार्थवादी साहित्य जो हर पाठक को जोड़ता है।
Bullets:
- दलित समाज की आवाज़ और चेतना का सशक्त चित्रण।
- संघर्ष से आत्मसम्मान और पहचान पाने की यात्रा।
- यथार्थवादी कहानियाँ जो समाज की सच्चाई को उजागर करती हैं।
- साहित्य और सामाजिक परिवर्तन का संगम।
- हर सोचने वाले पाठक के लिए एक जरूरी संग्रह।
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789363885110 |
| Publication date | 17 September 2025 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 192 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
डॉ. जसविन्दर कौर बिन्द्रा हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं की जानी-मानी लेखिका, आलोचक और अनुवादक हैं। 75 से अधिक अनूदित पुस्तकें, 5 मौलिक आलोचना ग्रंथ, और 40 से अधिक संकलनों में आलेख प्रकाशित कर चुकी हैं।
उन्होंने पंजाबी अकादमी दिल्ली से पीएचडी स्कॉलरशिप, अनुवाद पुरस्कार और रिसर्च फैलोशिप जैसे कई सम्मान प्राप्त किए हैं। राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों में वक्ता के रूप में सक्रिय सहभागिता, प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा काव्य पाठ के निमंत्रण, और लंबे समय तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन ने उन्हें साहित्य जगत में एक विशेष पहचान दी है।
उनकी लेखनी दलित चेतना, सामाजिक न्याय और समानता की आवाज़ को मज़बूती देती है।