Product Information
"कलियों को मुस्कुराने दो" एक ऐसा कहानी संग्रह है, जो समाज की विद्रूपताओं, मानवीय इच्छाओं और नैतिक पतन को बेबाकी से उजागर करता है। इसमें कुल 11 कहानियाँ हैं, जो न केवल पाठकों को झकझोरती हैं, बल्कि समाज के बदलते स्वरूप पर गहरा व्यंग्य भी प्रस्तुत करती हैं।
प्रभु दयाल मंदैया 'विकल' की यह कृति मानवीय मूल्यों के ह्रास, सामाजिक बंधनों और इच्छाओं के टकराव को सूक्ष्मता से उकेरती है। यह पुस्तक हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है, जो समाज की सच्चाई को गहराई से समझना चाहता है और एक नई सोच विकसित करना चाहता है।
Keypoints:
- समाज की कड़वी सच्चाइयों को उजागर करने वाली 11 बेहतरीन कहानियाँ।
- मानवीय मूल्यों
- नैतिकता और सामाजिक बंधनों पर गहन चिंतन।
- सरल भाषा में तीखा व्यंग्य
- जो पाठकों को सोचने पर मजबूर करेगा।
- हर वर्ग के पाठकों के लिए पठनीय और प्रेरणादायक।
- हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनमोल संग्रह।
Bullets:
- समाज की वास्तविकता को दर्शाने वाला कहानी संग्रह।
- मानवीय प्रवृत्तियों और सामाजिक बंधनों पर गहरी दृष्टि।
- व्यंग्य के माध्यम से समाज को आइना दिखाने वाली पुस्तक।
- विचारशील और संवेदनशील पाठकों के लिए अनिवार्य पठन।
- साहित्यिक चर्चा के लिए उपयुक्त और प्रभावशाली लेखन।
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789391041748 |
| Publication date | 29 April 2022 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 244 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
प्रभु दयाल मंदैया 'विकल' हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित लेखक हैं, जो सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और व्यंग्य के अनोखे मिश्रण के लिए जाने जाते हैं। उनकी लेखनी समाज की विसंगतियों को उजागर करती है और पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है। उनके द्वारा लिखी गई कहानियाँ आमजन के जीवन से जुड़ी होती हैं और यथार्थ को बेबाक तरीके से प्रस्तुत करती हैं।