Product Information
"उमर ख़ैयाम की रुबाइयाँ" कर्नल विपिन बिहारी श्रीवास्तव द्वारा उमर ख़ैयाम की कालजयी रुबाइयों का सरल हिंदी अनुवाद प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक ख़ैयाम के जीवन और दर्शन पर आधारित उनकी गहरी सोच को जन-सामान्य तक पहुँचाने का एक प्रभावी प्रयास है। लेखक ने मूल रुबाइयों की आत्मा को बरकरार रखते हुए उन्हें एक आधुनिक और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। इसमें लेखक की पोती विदुषी श्रीवास्तव द्वारा बनाए गए आकर्षक चित्र पुस्तक की खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। यह संग्रह कविता प्रेमियों और दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए अनमोल खजाना है।
Keypoints:
- उमर ख़ैयाम की रुबाइयों का सरल हिंदी अनुवाद।
- जीवन
- प्रेम और अस्तित्व पर गहरे दार्शनिक विचार।
- विदुषी श्रीवास्तव के आकर्षक चित्रों से सजी हुई।
- एक अनुभवी सेना अधिकारी और साहित्य प्रेमी लेखक द्वारा लिखी गई।
- कविता प्रेमियों और दर्शनशास्त्र के पाठकों के लिए अद्वितीय संग्रह।
Bullets:
- उमर ख़ैयाम की कालजयी कविताओं का सरल हिंदी में अनुवाद।
- जीवन के गहन दार्शनिक विचारों को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है।
- पुस्तक में शामिल अद्भुत चित्र इसे और भी खास बनाते हैं।
- लेखक कर्नल विपिन बिहारी श्रीवास्तव का पहला प्रकाशित साहित्यिक प्रयास।
- कविता और दर्शन के विद्यार्थियों के लिए आदर्श पुस्तक।
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789391041137 |
| Publication date | 09 July 2021 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 120 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
कर्नल विपिन बिहारी श्रीवास्तव का जन्म 1939 में उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले के शाहवासनगर में हुआ। लखनऊ विश्वविद्यालय और रुड़की विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने भारतीय सेना की ईएमई कोर में कर्नल के रूप में सेवा की। 1965 और 1971 के युद्धों में भाग लेने के बाद, सेवा निवृत्ति के पश्चात उन्होंने अपने साहित्यिक जुनून को जीवंत किया। एक कवि, लेखक और संस्मरणकार के रूप में यह उनकी पहली प्रकाशित पुस्तक है। इसमें उनकी पोती विदुषी श्रीवास्तव के अद्भुत चित्रों ने इसे और भी खास बना दिया है।