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“जज़्बात”, मयंक चतुर्वेदी (मानस) द्वारा रचित, भावनाओं के विस्तार में डूबने वाली ग़ज़लों का संग्रह है। यह ग़ज़लें केवल मोहब्बत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निराशा, गुस्सा, सामाजिक आलोचना और जीवन को आत्मशक्ति के साथ जीने की प्रेरणा देती हैं। मानूस की मुक्त वाणी में राजनीति के वेंचुएं उजागर होते हैं और उम्मीद-आत्मबल की किरणें भी जागती हैं। उनकी लेखनी एक नदी की तरह बहती है—शब्द दिल तक पहुँचते हैं और खिंचकर साथ ले जाते हैं। यदि आप प्रेम, ज़िंदगी की गहराई, और सामाजिक सच की तलाश में हैं, तो “जज़्बात” आपका साथी बनेगा।
Keypoints:
- प्रेम जीवन और सामाजिक चेतना की ग़ज़लें
- भावनाओं को आत्मबल में बदलने वाली ताक़त
- बेबाक राजनीतिक व सामाजिक आलोचना
- आधुनिक सौंदर्य शुद्धता के साथ शायरी
- ग़ज़ल प्रेमियों और आत्म-प्रेरणा चाहने वालों के लिए आदर्श
Bullets:
- दिल को छू लेने वाली कोमल और तीव्र कविताएँ
- प्रेम की ताजगी और जीवन की मुश्किलों का सुंदर संगम
- सामाजिक मजबूरी और राजनीतिक फरेब का बेबाकी से पर्दाफाश
- आसान भाषा में गहराई, जिससे पाठक सहज रूप से जुड़ जाता है
- निराशा से बाहर निकलने और प्रेरित जीवन जीने के लिए प्रेरक
Information
| Format | Paperback , |
|---|---|
| ISBN No. | 9789384314385 |
| Publication date | 17 December 2015 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 122 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
मयंक चतुर्वेदी, जिन्हें शायरी की दुनिया में मानस नाम से जाना जाता है, हिन्दी–उर्दू ग़ज़लों के माहिर कवि हैं। उनकी ग़ज़लों में प्रेम के कोमल रंग, जीवन की जद्दोज़हद और सामाजिक सच निहित हैं। उनकी लेखनी में शुद्धता और सहजता मिलती है—इतिहास और समकालीन जीवन को एक ही पल में शहनाई-सी गूँज दे जाती है। “जज़्बात” उनके गहराईपूर्ण अनुभवों का विस्तार है, जो पढ़ने वाले के दिलों तक पहुँचता है।