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Pratibha Ke Anek Rang: Pandit Ramashrey Jha ‘Ramarang’ | Dr. Manisha Sharma | भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक महान स्तंभ को समर्पित शोधात्मक कृति | Rigi Publication

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“प्रतिभा के अनेक रंग: पंडित रामाश्रय झा ‘रामरंग’” डॉ. मनीषा शर्मा द्वारा रचित एक गहन शोधात्मक एवं भावपूर्ण कृति है, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान साधक पंडित रामाश्रय झा ‘रामरंग’ के जीवन, व्यक्तित्व और सांगीतिक योगदान को समर्पित है। पंडित रामाश्रय झा का असमय देहावसान संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। उनकी रचनाएँ साहित्यिक और सांगीतिक – दोनों दृष्टियों से अत्यंत समृद्ध हैं। उनकी कृतियों में शास्त्रीय परंपरा, भाव-संवेदना और सौंदर्यबोध का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। यह पुस्तक पंडित जी के व्यक्तित्व, सांस्कृतिक परिवेश, संस्कारों, संगीत-दृष्टि और रचनात्मक उपलब्धियों का व्यवस्थित एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है। शोधार्थियों, संगीत विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं रसिकों के लिए यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोगी सिद्ध होती है। डॉ. मनीषा शर्मा ने इस कृति में शास्त्रीय संगीत की परंपरा और अकादमिक शोध के बीच सेतु स्थापित किया है। सरल किंतु विद्वतापूर्ण भाषा में लिखी गई यह पुस्तक भारतीय संगीत विरासत को संरक्षित एवं प्रचारित करने का एक सार्थक प्रयास है। Rigi Publication द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक पेपरबैक एवं ई-बुक दोनों रूपों में उपलब्ध है। ई-बुक रेंट सुविधा विशेष रूप से rigipublication.com पर उपलब्ध है, जिससे यह पुस्तक भारत सहित अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक सहज रूप से पहुँचती है।

Product Information

“प्रतिभा के अनेक रंग: पंडित रामाश्रय झा ‘रामरंग’” डॉ. मनीषा शर्मा द्वारा रचित एक गहन शोधात्मक एवं भावपूर्ण कृति है, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान साधक पंडित रामाश्रय झा ‘रामरंग’ के जीवन, व्यक्तित्व और सांगीतिक योगदान को समर्पित है।

पंडित रामाश्रय झा का असमय देहावसान संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। उनकी रचनाएँ साहित्यिक और सांगीतिक – दोनों दृष्टियों से अत्यंत समृद्ध हैं। उनकी कृतियों में शास्त्रीय परंपरा, भाव-संवेदना और सौंदर्यबोध का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

यह पुस्तक पंडित जी के व्यक्तित्व, सांस्कृतिक परिवेश, संस्कारों, संगीत-दृष्टि और रचनात्मक उपलब्धियों का व्यवस्थित एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है। शोधार्थियों, संगीत विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं रसिकों के लिए यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोगी सिद्ध होती है।

डॉ. मनीषा शर्मा ने इस कृति में शास्त्रीय संगीत की परंपरा और अकादमिक शोध के बीच सेतु स्थापित किया है। सरल किंतु विद्वतापूर्ण भाषा में लिखी गई यह पुस्तक भारतीय संगीत विरासत को संरक्षित एवं प्रचारित करने का एक सार्थक प्रयास है।

Rigi Publication द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक पेपरबैक एवं ई-बुक दोनों रूपों में उपलब्ध है। ई-बुक रेंट सुविधा विशेष रूप से rigipublication.com पर उपलब्ध है, जिससे यह पुस्तक भारत सहित अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक सहज रूप से पहुँचती है।


Keypoints:

  • पंडित रामाश्रय झा ‘रामरंग’ के जीवन और कृतित्व का प्रामाणिक शोध
  • संगीत-जीवनी एवं संगीतशास्त्र का समन्वय
  • शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं संगीत शिक्षकों के लिए उपयोगी
  • एक विदुषी एवं सक्रिय गायिका द्वारा रचित
  • Rigi Publication द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध

Bullets:

  • भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान व्यक्तित्व पर आधारित शोध कृति
  • पंडित रामाश्रय झा के सांगीतिक और साहित्यिक योगदान का दस्तावेज
  • संगीत विश्वविद्यालयों एवं पुस्तकालयों के लिए अनिवार्य ग्रंथ
  • अकादमिक एवं रसिक पाठकों – दोनों के लिए उपयुक्त
  • भारतीय संगीत विरासत के संरक्षण का महत्वपूर्ण प्रयास

Information

Format Paperback , EBook
ISBN No. 9789388393386
Publication date 19 July 2019
Publisher Rigi Publication
Publication City/Country: India
Language Hindi
Book Pages 146
Book Size 5.5" x 8.5"
Book Interior Black & white interior with white paper (Premium Quality)

About Author

डॉ. मनीषा शर्मा भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक प्रतिष्ठित विदुषी, गायिका एवं शिक्षिका हैं। उन्होंने वनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान से संगीत में पी.एच.डी. उपाधि प्राप्त की है।
उन्होंने बी.ए. एवं एम.ए. (संगीत – गायन) की शिक्षा जानकी देवी बजाज कन्या महाविद्यालय, कोटा (राजस्थान) से प्राप्त की।

वर्तमान में वे SCOPA – स्कूल ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स, सूरत (गुजरात) में व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं। समय-समय पर संगीत सभाओं, संगोष्ठियों एवं मंचीय प्रस्तुतियों में सक्रिय भागीदारी करती हैं। उनका लेखन अकादमिक गहराई एवं कलात्मक संवेदना का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।

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