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“हादसा” लेखक प्रभु दयाल मंढइया ‘विकल’ द्वारा रचित एक अत्यंत संवेदनशील, विचारोत्तेजक और आत्मा को झकझोर देने वाला हिन्दी उपन्यास है, जो एक क्षणिक भूल के आजीवन परिणामों को उजागर करता है।
यह कथा एक सीधे-सादे, शिक्षित और नैतिक युवक के जीवन की है, जो मित्रों के कटाक्ष और स्वयं को सिद्ध करने की हठ में एक अंधेरे रेल डिब्बे में ऐसा कृत्य कर बैठता है, जिसे वह स्वयं भी जीवन भर “हादसा” ही मानता है। यह एक ऐसा हादसा है, जो न केवल एक स्त्री को आहत करता है, बल्कि स्वयं कर्ता की आत्मा को भी छलनी कर देता है।
घटना के पश्चात अपराधबोध उसके जीवन का स्थायी साथी बन जाता है। वह अनदेखी स्त्री को खोजने के लिए शहर-दर-शहर भटकता है, केवल इसलिए कि उससे क्षमा माँग सके और विवाह कर अपने पाप का प्रायश्चित कर सके। उसके जीवन में आने वाली हर विपत्ति—सरकारी धन की चोरी का आरोप, मंगेतर की आकस्मिक मृत्यु, आर्थिक तबाही—वह अपने उसी पाप की सज़ा मानकर स्वीकार करता है।
किन्तु यह उपन्यास केवल पतन की कहानी नहीं है। अथक परिश्रम, कर्मयोग और अडिग विश्वास के बल पर वही व्यक्ति आईएएस अधिकारी बनता है। सत्ता, अधिकार और प्रतिष्ठा उसे नहीं बदलते। वह पहले की तरह ही विनम्र, न्यायप्रिय और मानवीय बना रहता है—और इसी कारण एक आदर्श अधिकारी के रूप में प्रतिष्ठित होता है।
“हादसा” प्रकृति, भाग्य और मनुष्य के गहरे संबंध को दर्शाता है। यह बताता है कि दुख-सुख स्थायी नहीं होते, लेकिन कर्म और नैतिकता ही मनुष्य की वास्तविक पहचान हैं।
Rigi Publication द्वारा प्रकाशित यह उपन्यास पेपरबैक, ईबुक और ईबुक-ऑन-रेंट रूप में उपलब्ध है।
Keypoints:
- 222 पृष्ठों का प्रभावशाली हिन्दी उपन्यास
- अपराधबोध और प्रायश्चित पर आधारित गहन कथा
- सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक दृष्टिकोण
- साधारण व्यक्ति से आदर्श अधिकारी बनने की यात्रा
- Rigi Publication द्वारा गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन
Bullets:
- एक भूल के आजीवन परिणामों की मार्मिक प्रस्तुति
- कर्म और भाग्य के सिद्धांत पर आधारित प्रेरक कथा
- यथार्थवादी और संवेदनशील पात्र चित्रण
- नैतिक मूल्यों और न्यायप्रिय जीवन की प्रेरणा
- गम्भीर हिन्दी साहित्य प्रेमियों के लिए अनिवार्य पाठ
Information
| Format | Paperback , EBook |
|---|---|
| ISBN No. | 9789388393980 |
| Publication date | 03 February 2021 |
| Publisher | Rigi Publication |
| Publication City/Country: | India |
| Language | Hindi |
| Book Pages | 222 |
| Book Size | 5.5" x 8.5" |
| Book Interior | Black & white interior with white paper (Premium Quality) |
About Author
प्रभु दयाल मंढइया ‘विकल’ समकालीन हिन्दी साहित्य के ऐसे लेखक हैं जिनकी लेखनी सामाजिक यथार्थ, नैतिक संघर्ष और मानवीय मनोविज्ञान को गहराई से छूती है। उनके उपन्यास कर्म, भाग्य और आत्मबोध के दर्शन से ओतप्रोत होते हैं। हादसा उनकी सशक्त, संवेदनशील और विचारप्रधान साहित्यिक दृष्टि का उत्कृष्ट उदाहरण है।