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Bhanwar Jaavo Mathura Dham

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बृज के माधुर्य से सराबोर "भंवर जावौ मथुरा धाम" भ्रमर गीतों की ऐसी रचना है जिसमें भगवान श्री कृष्ण के मथुरा गमन के पश्चात राधा रानी एवं गोपियों के विरह की मर्मस्पर्शी गाथा है, बृज के कण कण की व्यथा है, क्षोभ है, क्रोध है, उलाहने हैं, प्रणय है और समर्पण भी है। श्रीकृष्ण के बृज में प्रवास काल की अनेक घटनाएं, एक कथानक के रूप में प्रस्तुत करने की चेष्टा की गई है। वर्तमान में मनाए जाने वाले त्योहारों, विशेषकर होली के विभिन्न रूपों की  विवेचना है । आशा है, पाठक आदि  से अंत  तक निरंतर पठन कर आनन्दित होंगे।

Product Information

बृज के माधुर्य से सराबोर "भंवर जावौ मथुरा धाम" भ्रमर गीतों की ऐसी रचना है जिसमें भगवान श्री कृष्ण के मथुरा गमन के पश्चात राधा रानी एवं गोपियों के विरह की मर्मस्पर्शी गाथा है, बृज के कण कण की व्यथा है, क्षोभ है, क्रोध है, उलाहने हैं, प्रणय है और समर्पण भी है। श्रीकृष्ण के बृज में प्रवास काल की अनेक घटनाएं, एक कथानक के रूप में प्रस्तुत करने की चेष्टा की गई है। वर्तमान में मनाए जाने वाले त्योहारों, विशेषकर होली के विभिन्न रूपों की  विवेचना है । आशा है, पाठक आदि  से अंत  तक निरंतर पठन कर आनन्दित होंगे।

How to Use This Book:

  • भक्ति साधना: राधा-कृष्ण की भक्ति में लीन होने के लिए।
  • साहित्य अध्ययन: हिंदी साहित्य और ब्रज संस्कृति के अध्ययन के लिए।
  • उपहार: भक्तों और साहित्य प्रेमियों के लिए उपहार के रूप में।

Keypoints:

  • राधा रानी और गोपियों के विरह की मर्मस्पर्शी कथा।
  • ब्रज के कण कण की व्यथा और समर्पण का चित्रण।
  • श्रीकृष्ण के प्रवास काल की घटनाओं का वर्णन।
  • वर्तमान त्योहारों
  • विशेषकर होली की विवेचना।
  • इंद्रेश प्रकाश गुप्ता द्वारा रचित उत्कृष्ट साहित्य।

Bullets:

  • मर्मस्पर्शी विरह गीत: राधा रानी एवं गोपियों के विरह की गाथा।
  • ब्रज की व्यथा: ब्रज के कण कण की व्यथा और समर्पण।
  • कृष्ण लीला: श्रीकृष्ण के प्रवास काल की घटनाएं।
  • त्योहारों की विवेचना: वर्तमान त्योहारों, विशेषकर होली का विश्लेषण।
  • प्रसिद्ध लेखक: इंद्रेश प्रकाश गुप्ता द्वारा रचित।

Information

Format Paperback , EBook
ISBN No. 9789363880849
Publication date 24 May 2024
Publisher Rigi Publication
Publication City/Country: India
Language Hindi
Book Pages 72
Book Size 5.5" x 8.5"
Book Interior Black & white interior with white paper

About Author

इस प्रस्तुति के रचियेता, इंद्रेश प्रकाश गुप्ता (जन्म १९४०), स्वयं का उद्यम एवं व्यवसाय स्थापित करने से पहले, इस्पात उद्योग में प्रोडक्शन इंजीनियर के पद पर कार्यरत रहे। साहित्य के प्रति लगाव तथा अपने मनोभावों को मूर्त रूप देने की ललक अल्पायु से ही पनपती रही थी। १९५९ से ही इनकी साहित्यिक सर्जना रूप लेने लगी थी तथा स्थानीय पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन यदा-कदा होता रहा। अंततः २००३ में अपने औद्योगिक जीवन से सेवानिवृति लेकर उन्होंने साहित्य सेवा को अपना ध्येय बना लिया। हिंदी, उर्दू एवं बृज भाषा में अपने उद्गारों को पुस्तकों के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं । अहिंदी भाषियों के हितार्थ कई उत्कृष्ट कृतियों का अंग्रेजी में अनुवाद भी करते रहे हैं।

साहित्य सेवा के लिए, उन्हें १७वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में अखिल भारतीय कवि सभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ""काव्य श्री"" सम्मान से सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष २०१७ के हृषीकेश चतुर्वेदी सर्जना पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इनकी प्रकाशित कुछ विशिष्ट रचनाओं में केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय से मान्यता प्राप्त “मन के मनके”, “दो क्षण मेरी भी तो सुन लो”, “सुधियों के सागर”, “आलय” तथा ""भंवर जावौ मथुरा धाम"" प्रमुख हैं।

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